अनुलोम विलोम प्राणायाम का अर्थ विधिया और लाभ

अनुलोम विलोम प्राणायाम एक अत्यंत प्रभावशाली और प्राचीन श्वास तकनीक है, जिसे नाड़ी शुद्धि प्राणायाम भी कहा जाता है। यह योग की एक ऐसी विधि है जो शरीर की नाड़ियों (ऊर्जा चैनलों) को शुद्ध करती है और मन को शांत करती है।

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अनुलोम विलोम का अर्थ:

  • अनुलोम = सही दिशा में (Natural order)

  • विलोम = विपरीत दिशा में (Reverse order)

यह प्राणायाम बाईं और दाईं नासिका छिद्रों से बारी-बारी से श्वास लेने और छोड़ने की प्रक्रिया है।

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अनुलोम विलोम करने की विधि:

  1. आरामदायक ध्यान की मुद्रा में बैठ जाएं (जैसे पद्मासन, सुखासन)।

  2. अपनी आँखें बंद करें और शरीर को शांत करें।

  3. दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिनी नासिका बंद करें।

  4. बाईं नासिका से धीरे-धीरे लंबी, गहरी सांस लें (पूरक)।

  5. अब बाईं नासिका को अनामिका या रिंग फिंगर से बंद करें और अंगूठा हटाकर दाहिनी नासिका से धीरे-धीरे सांस छोड़ें (रेचक)।

  6. फिर दाहिनी नासिका से ही सांस लें, और बाईं नासिका से छोड़ें।

  7. यही एक चक्र (cycle) कहलाता है। इस प्रक्रिया को 5 से 10 मिनट तक दोहराएं।

  8. प्राचीन ऋषि मुनि वैज्ञानिक थे जिन्होंने अनेकों अविष्कार किया।


विशेष ध्यान:

  • सांस धीमी और गहरी होनी चाहिए — बिना किसी दबाव के।

  • प्राणायाम के समय कोई भी आवाज न करें।

  • भोजन के तुरंत बाद न करें।

  • हृदय, उच्च रक्तचाप और अस्थमा के मरीज डॉक्टर की सलाह लें।


अनुलोम विलोम के लाभ:

  1. मन की शांति और एकाग्रता में वृद्धि।

  2. तनाव, चिंता और अवसाद में राहत।

  3. फेफड़ों की क्षमता में वृद्धि और श्वसन तंत्र को मजबूत करता है।

  4. शरीर की ऊर्जा नाड़ियों (इड़ा और पिंगला) को संतुलित करता है।

  5. रक्तचाप को नियंत्रित करता है।

  6. नींद में सुधार और मानसिक स्पष्टता प्रदान करता है।

  7. ध्यान के लिए शरीर और मन को तैयार करता है।


समय और अवधि:

  • शुरुआत में दिन में 5 मिनट करें, फिर धीरे-धीरे बढ़ाकर 15–20 मिनट तक कर सकते हैं।

  • सूर्योदय के समय या खाली पेट करना अधिक लाभकारी है।

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