महा योगिनी गैरी मां _
महासधिका गैरी मां ३७५ वर्ष की है । योगिनी होने के कारण युवती दिखती है। मंसूरी से 5 कोष आगे हिमालय मे इनकी गुफा है । सुभ्र सफेदी के बीच चुड़ाओ से घिरे एक हरियाली का टुकड़ा। शायद किसी विशेष उद्देश्य से प्रकृति ने इस जगह को सवार कर रखा है ।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!एक शांत निराला स्थान। यहां प्रवेश केवल निर्विकल्प समाधि को प्राप्त सिद्ध ही कर सकता है । कहते है मां का जन्म कश्मीर के कुलीन ब्रह्मण परिवार मे हुआ था तीव्र वैराग्य के कारण घर छोड़कर हिमालय में आ गईं । हिमालय में भ्रमणकाल के दौरान निगमानंद परमहंस अपने गुरु स्वामी सच्चिदानंद जी के साथ इनसे मिलने गए थे। उन्हे आश्चर्य हुआ था यह देखकर की हिमालय मे अपनी गुफा में एक परम सुंदरी योगिनी समद्धिस्थ हैं । यह अकेले यहां कैसे वास करती है । https://www.youtube.com/@allvedant
दोनो गुरु शिष्य ने महायोगिनि मां को दंडवत प्रणाम किया। फिर गैरी मां ने उन्हे स्नेह भरी दृष्टि से देखा । महा योगिनी मां की कृपा से एकाएक निगमानंद जी के अन्तरदृष्टि खुल गईं। आगे की यात्रा के लिए दोनो गुरु_ शिष्य कैलाश मानसरोवर के लिए निकल पड़े । कैलाश मानसरोवर के प्राकृतिक सौंदर्य ने उनके पथ के श्रम को भुला दिया ।
निगमानंद ने स्पष्ट देखा कि सरोवर के दूसरी ओर पर बहुत ही परम सुंदरी युवतिया निर्वस्त्र स्नान कर रही हैं । उन्हे आश्चर्य हुआ ये कौन है ? उन्होने गुरु सच्चिदानंद से पूछा _ स्नान करने वाली युवतियां कौन है ? विस्मय से सच्चिदानंदजी ने कहा वत्स ! तेरा तृतीय नेत्र खुल गई है । ये सभी देवलोक की अप्सराएं है ।
गुरु ने बताया कि पृथ्वी के सात स्तरों मे अवस्थित, निम्न स्तर के जीव उच्च स्तरीय जीव को देख नही पाते। योगियों की अतिंद्रीय दृष्टि ही केवल सब देख सकती है।
